बीमा पॉलिसी खरीदने से पहले इन मुख्य बातों की जानकारी होना बहुत ज़रूरी है:
प्लान के फायदे: पॉलिसी से आपको और आपके परिवार को क्या लाभ मिलेगा।
प्रीमियम और अवधि: आपको कितने समय तक और कितनी राशि जमा करनी होगी।
क्लेम सेटलमेंट रेशियो: कंपनी कितनी आसानी से क्लेम पास करती है।
नियम और शर्तें: ‘Exclusions’ (क्या शामिल नहीं है) को ध्यान से पढ़ें।
सरेंडर वैल्यू: अगर आप पॉलिसी बीच में बंद करते हैं, तो कितना पैसा वापस मिलेगा।
पॉलिसी के दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ना और अपनी ज़रूरतों के हिसाब से सही कवर चुनना सबसे महत्वपूर्ण है।
कार इंश्योरेंस पॉलिसी होने के बावजूद क्लेम रिजेक्ट होना काफी परेशान करने वाला होता है। अक्सर हम पॉलिसी लेते समय छोटे नियमों (Terms & Conditions) पर ध्यान नहीं देते, जिसकी वजह से बाद में दिक्कत आती है।
यहाँ मुख्य कारण दिए गए हैं जिनकी वजह से क्लेम रिजेक्ट होता है:
1. ड्राइविंग लाइसेंस और नियमों का उल्लंघन
अवैध लाइसेंस: यदि गाड़ी चलाने वाले के पास वैध (Valid) ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है या वह एक्सपायर हो चुका है।
नशे में गाड़ी चलाना: अगर एक्सीडेंट के वक्त ड्राइवर शराब या किसी नशीले पदार्थ के प्रभाव में था।
गलत उपयोग: अगर आपने ‘प्राइवेट कार’ की पॉलिसी ली है लेकिन गाड़ी का इस्तेमाल कमर्शियल काम (जैसे टैक्सी या डिलीवरी) के लिए कर रहे हैं।
2. जानकारी छिपाना या गलत जानकारी देना
NCB (No Claim Bonus) का गलत दावा: अगर आपने पिछली पॉलिसी में क्लेम लिया था, लेकिन नई पॉलिसी में डिस्काउंट पाने के लिए झूठ बोला कि कोई क्लेम नहीं लिया है।
गाड़ी में बदलाव: अगर आपने गाड़ी में CNG किट लगवाई है या कोई बड़ा मॉडिफिकेशन कराया है और इसकी जानकारी इंश्योरेंस कंपनी को नहीं दी।
3. तकनीकी और समय सीमा से जुड़ी गलतियाँ
सूचना देने में देरी: एक्सीडेंट होने के तुरंत बाद (आमतौर पर 24 से 48 घंटे के भीतर) कंपनी को खबर देनी होती है। बहुत देरी करने पर कंपनी क्लेम खारिज कर सकती है।
पॉलिसी का लैप्स होना: अगर आपने समय पर प्रीमियम नहीं भरा और पॉलिसी की तारीख निकल गई है, तो उस दौरान हुए किसी भी नुकसान की भरपाई नहीं होगी।
इंजन स्टार्ट करने की गलती: बाढ़ या पानी भरे इलाके में अगर गाड़ी बंद हो जाए और आप उसे बार-बार स्टार्ट करने की कोशिश करें (जिससे इंजन सीज हो जाए), तो कंपनी इसे “जानबूझकर किया गया नुकसान” मानती है। इसके लिए इंजन प्रोटेक्ट कवर होना जरूरी है।
4. कागजी कार्रवाई में कमी
FIR की कमी: चोरी या बड़े एक्सीडेंट के मामले में पुलिस की FIR बहुत जरूरी होती है। इसके बिना कंपनी क्लेम प्रोसेस नहीं करती।
क्लेम रिजेक्ट होने से कैसे बचें?
पॉलिसी के ‘Exclusions’ (क्या कवर नहीं है) को ध्यान से पढ़ें।
गाड़ी में कोई भी बड़ा बदलाव (जैसे गैस किट) कराने पर कंपनी को तुरंत बताएं।
एक्सीडेंट के समय मौके की फोटो या वीडियो जरूर बना लें।
अपनी KGI Secure Agency के ग्राहकों को सही जानकारी देना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि क्लेम रिजेक्ट होने पर सबसे पहले ग्राहक अपने एजेंट को ही याद करता है।
आप को ये 5 मुख्य बातें समझा दें, तो क्लेम रिजेक्ट होने की गुंजाइश बहुत कम हो जाएगी:
1. No Claim Bonus (NCB) की सही जानकारी
सबसे ज्यादा क्लेम इसी वजह से रिजेक्ट होते हैं। अगर ग्राहक ने पिछली पॉलिसी में क्लेम लिया है, तो नई पॉलिसी (KGI Secure के जरिए) बनवाते समय उन्हें NCB डिस्काउंट नहीं लेना चाहिए। अगर गलत डिस्काउंट लिया, तो कंपनी पूरा क्लेम रिजेक्ट कर देती है।
2. सही एड-ऑन्स (Add-ons) का चुनाव
सिर्फ “सस्ती” पॉलिसी देने के बजाय, उन्हें Zero Dep (जीरो डेप्रिसिएशन) और Engine Protect जैसे कवर जरूर दें। अक्सर लोग इंजन में पानी जाने पर गाड़ी स्टार्ट कर देते हैं जिससे इंजन खराब हो जाता है, और बिना ‘इंजन प्रोटेक्ट’ के कंपनी एक रुपया भी नहीं देती।
3. समय सीमा (Time Limit)
ग्राहकों को बताएं कि एक्सीडेंट या चोरी के मामले में 24 से 48 घंटे के भीतर कंपनी को सूचित करना अनिवार्य है। देरी होने पर कंपनी इसे संदिग्ध मानकर क्लेम खारिज कर सकती है।
4. कमर्शियल इस्तेमाल (Commercial Use)
अगर गाड़ी प्राइवेट नंबर (White Plate) की है, तो उसे कभी भी टैक्सी या डिलीवरी के काम में इस्तेमाल न करें। एक्सीडेंट के वक्त अगर गाड़ी में सवारियां पैसे देकर बैठी मिलीं, तो क्लेम नहीं मिलेगा।
5. गाड़ी में बदलाव (Modifications)
अगर ग्राहक ने गाड़ी खरीदने के बाद उसमें CNG किट लगवाई है या कोई बड़ा बदलाव किया है, तो उसे इंश्योरेंस पेपर पर चढ़वाना (Endorsement) बहुत जरूरी है।
एक प्रो-टिप (Pro-Tip):
चूंकि आप अपनी एजेंसी की वेबसाइट बनाने की सोच रहे हैं, तो वहां एक “Claim Guide” का सेक्शन जरूर रखें। इससे ग्राहकों का आप पर भरोसा बढ़ेगा और क्लेम के वक्त उन्हें इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा।
क्या आप अपनी एजेंसी के लिए कोई खास क्लेम चेकलिस्ट (Checklist) बनवाना चाहते हैं जो आप ग्राहकों को व्हाट्सएप पर भेज सकें?
पॉलिसी एजेंसी से लेना चाहिए जिस एजेंसी का नंबर आपके पास हो और 24/ 7 ऑनलाइन के चक्कर कहीं ऑफिस का चकर ना लगाना पड़े ये मेरा ओपिनियन है
